अधूरी मुलाक़ात शायरी

वो मुलाक़ात कुछ अधूरी सी लगी,
पास हो कर भी कुछ दूरी सी लगी,
होंठों पे हंसी पर आंखों में नमी
पहली बार किसी की चाहत ज़रूरी सी लगी।

 

Tujhse Door Rehke Shayari

मोहब्बत के लबोँ पर फिर वही तकरार बैठी है,
एक प्‍यारी सी मीठी सी कोई झनकार बैठी है,
तुझसे दूर रहकर के हमारा हाल है ऐसा
मैँ तेरे बिन यहाँ, तू मेरे बिन वहाँ बेकार बैठी है।

 

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वो मुलाक़ात कुछ अधूरी सी लगी

Adhuri Mulakat Love Shayari

 

वो मुलाक़ात कुछ अधूरी सी लगी,
पास हो कर भी कुछ दूरी सी लगी,
होंठों पे हंसी पर आंखों में नमी
पहली बार किसी की चाहत ज़रूरी सी लगी।

 

किस्मत खुदा लिखता है लोग नहीं

ये सुना है लोगों से,
वो मेरी किस्मत में नहीं,
फिर सोचता हूँ,
किस्मत खुदा लिखता है लोग नहीं…।